हमारे अपने भीतर आगे-पीछे की बातों के गुबार कम नहीं होते। बाहर का प्रदूषण मन के उस मौसम को और बिगाड़ देता है। उदासी और खालीपन का धुआं बढ़ता रहता है। कुछ करने का मन नहीं होता। पर चैन की सांस लेनी है तो...from Live Hindustan Rss feedhttps://https://ift.tt/2ryn68v
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