धारा 377 निरस्त होने के दो साल बाद भी एलजीबीटीक्यू समुदाय पूर्वाग्रह से जूझ रहा है। छह सितंबर, 2018 को ही सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक संबंधों को अपराध करार देने वाली धारा 377 को निरस्त कर दिया था।
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